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इम्प्लॉयबिलिटी स्किल्स January 27, 2010

Posted by aglakadam in Career News And updates.
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एक ताजा सर्वे में बहुराष्ट्रीय कंपनियों में कार्यरत 90 फीसदी भारतीय प्रोफेशनल्स ने अगले पांच वर्ष में मौजूदा कौशल के आउटडेटेड होने की आशंका व्यक्त की है। ऐसे में उन्होंने नौकरी के बाजार में टिके रहने के लिए प्रशिक्षण की जरूरत को अहम बताया है। ग्लोबल वर्कफोर्स सॉल्यूशन प्रदाता फर्म कैली सर्विसेज के इस सर्वे में भारत के पांच हजार कर्मियों सहित दुनियाभर के एक लाख कर्मचारियों की राय जानी गई थी। सर्वे में शामिल 18 से 29 वर्ष और 30 से 47 वर्ष आयु वर्ग वाले 90 फीसदी कर्मियों ने अगले पांच वर्षे में काम करने के तौर-तरीके बदल जाने की संभावना व्यक्त करते हुए कौशल बढ़ाने की जरूरत को अहम बताया। वहीं, 69 फीसदी उत्तरदाताओं ने प्रशिक्षण को नियोक्ता और कर्मचारी की संयुक्त जिम्मेदारी माना।

एक तिहाई उत्तरदाताओं ने माना कि मौजूदा नियोक्ता द्वारा उपलब्ध कराया जा रहा प्रशिक्षण उनकी भविष्य की आवश्यकताओं को पूरा करने में सक्षम नहीं है। 48-65 वर्ष आयु वर्ग वाले कर्मचारी अपने प्रशिक्षण के स्तर को लेकर सबसे ज्यादा चिंतित पाए गए, जबकि 43 फीसदी ने कौशल व कैरियर में बढ़ोतरी के लिहाज से इसे अपर्याप्त करार दिया। 52 फीसदी प्रोफेशनल्स ने नौकरी के साथ प्रशिक्षण की जरूरत को महत्वपूर्ण बताया, जबकि 33 फीसदी कर्मियों ने प्रोफेशनल डेवलपमेंट कोर्स करने में रुचि दिखाई। 13 फीसदी ने स्वाध्याय और 3 फीसदी ने कॉलेज की पढ़ाई को अहम बताया। कौशल बढ़ाने को लेकर महिलाओं और पुरुषों के नजरिए में भिन्नता देखी गई। महिलाओं ने जहां नौकरी के साथ प्रशिक्षण को अहम बताया, वहीं पुरुषों ने प्रोफेशनल डेवलपमेंट कोर्स करने को सबसे बेहतर विकल्प करार दिया।

कंपनियां इम्प्लॉयबिलिटी स्किल्स पर इतना जोर क्यों देती हैं, इसका भी बड़ा दिलचस्प कारण है। कंपनियों में संबंधित फील्ड के एक्सपट्ïर्स होते हैं, जो नए कर्मचारियों को कार्य के विषय में टेक्नीकल ज्ञान व ट्रेनिंग देने का काम करते हैं। लेकिन मुख्य समस्या यह होती है कि इन कर्मचारियों को आधारभूत इम्प्लॉयबिलिटी स्किल्स में ट्रेनिंग करा पाना अत्यंत मुश्किल होता है। एक नए कम्प्यूटर इंजीनियर को एक सॉफ्टवेयर कंपनी असानी से ‘सी++ ’ व ‘जावा ’ की ट्रेनिंग दे सकती है परंतु उसे बेहतर टीम वर्क सिखाना, प्रोफेशनल ई-मेल लिखना या कम्युनिकेशन स्किल सिखा पाना कंपनियों के लिए एक मुश्किल भरा काम है। यही वजह है कि कई बार एक अपेक्षाकृत कम टेक्नीकल ज्ञान वाले युवा को, जिसमें इम्प्लॉयबिलिटी स्किल्स हों, नौकरी आसानी से मिल जाती है। जबकि

ज्यादा टेक्नीकल ज्ञान वाले ऐसे छात्र को, जिसमें इम्प्लॉयबिलिटी स्किल्स की कमी हो, नौकरी मिलने में परेशानी हो सकती है। Varsha Varwandkar ,Career Psychologist ,www.aglakadam.com ,Raipur

Comments»

1. Verma Umesh - January 27, 2010

My Goodness, so important for us.


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