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बसंत पंचमी —वर दे वीणा वादिनी वर दे January 19, 2010

Posted by aglakadam in career guidance and counselling.
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19-01-2010
कल बसंत पंचमी है ,माता सरस्वती की पूजा और आराधना का पर्व | |बसंत पंचमी के पर्व को मनाने का एक कारण बसंत पंचमी के दिन सरस्वती जयंती का होना भी बताया जाता है। कहते हैं कि देवी सरस्वती बसंत पंचमी के दिन ब्रह्मा के मानस से अवतीर्ण हुई थीं। बसंत के फूल, चंद्रमा व हिम तुषार जैसा उनका रंग था।

बसंत पंचमी के दिन जगह-जगह माँ शारदा की पूजा-अर्चना की जाती है। माँ सरस्वती की कृपा से प्राप्त ज्ञान व कला के समावेश से मनुष्य जीवन में सुख व सौभाग्य प्राप्त होता है। माघ शुक्ल पंचमी को सबसे पहले श्रीकृष्ण ने देवी सरस्वती का पूजन किया था, तब से सरस्वती पूजन का प्रचलन बसंत पंचमी के दिन से मनाने की परंपरा चली आ रही है।

सरस्वती ने अपने चातुर्य से देवों को राक्षसराज कुंभकर्ण से कैसे बचाया, इसकी एक मनोरम कथा वाल्मिकी रामायण के उत्तरकांड में आती है। कहते हैं देवी वर प्राप्त करने के लिए कुंभकर्ण ने दस हजार वर्षों तक गोवर्ण में घोर तपस्या की। जब ब्रह्मा वर देने को तैयार हुए तो देवों ने कहा कि यह राक्षस पहले से ही है, वर पाने के बाद तो और भी उन्मत्त हो जाएगा तब ब्रह्मा ने सरस्वती का स्मरण किया।

सरस्वती राक्षस की जीभ पर सवार हुईं। सरस्वती के प्रभाव से कुंभकर्ण ने ब्रह्मा से कहा- ‘स्वप्न वर्षाव्यनेकानि। देव देव ममाप्सिनम।’ यानी मैं कई वर्षों तक सोता रहूँ, यही मेरी इच्छा है। इस तरह देवों को बचाने के लिए सरस्वती और भी पूज्य हो गईं। हमारी भारतचीय परंपरा में शिक्षा मुहूर्त के लिए इस दिन को श्रेष्ठतम माना गया है। इस दिन छोटे बच्चों को माँ सरस्वती की पूजा करके अक्षर ज्ञान कराया जाता है।

इस दिन सौंदर्य के अलावा ज्ञान और कला की देवी सरस्वती की पूजा का विधान अकारण नहीं है। इस समय प्रकृति के साथ मनुष्य भी शीत की ठिठुरन से मुक्त होता है। यह मुक्ति उसमें उत्साह का संचार करती है और वह साधना की ओर प्रवृत्त होता है। उसकी रचनात्मक शक्ति जागती है और वह सृजन में लग जाता है। बसंत पंचमी के दिन घर पर माता सरस्वती की के साथ ही पुस्तकों, कलम और कापियों की भी पूजा की जाती है। घर में रखे हुए धार्मिक ग्रंथों की पूजा भी बसंत पंचमी के दिन की जाती है। परम-पिता माता सरस्वती के साथ वेदों में निवास करते हैं अत: इस दिन वेदों की भी पूजा की जाती है। संगीत के विद्यार्थी घर में रखे हुए वाद्य यंत्रों की पूजा करते हैं। पूजा में माँ सरस्वती को पीला और धानी रंग का वस्त्र भेंट किया जाता है। इस दिन प्रसाद के रूप बुन्दियाँ, बेर, मूंग की दाल चढ़ाई जाती है। माता सरस्वती को ब्रह्मा की पुत्री भी माना गया है। जो छात्र संगीत एवं किसी कला का ज्ञान प्राप्त करना चाहते हैं उनके लिए माघ शुक्ल पंचमी यानी बसंत पंचमी बहुत ही शुभ मुहूर्त होता है।
परीक्षा के समय में हर छात्र चाहता है कि वह परीक्षा में उत्तीर्ण हो बल्कि उसकी दिली ख्वाहिश होती है कि वह अच्दे नंबरों से परीक्षा उत्तीर्ण करें । कई छात्रों की समस्या होती है कि कड़ी मेहनत के बावजूद उन्हें पाठ याद नहीं रह पाता, वे जवाब भूल जाते हैं । छात्रों को अच्छी सफलता के लिए खूब पढ़-लिखकर ज्ञान व विद्या की देवी सरस्वती की आराधना करनी चाहिए ।—-Varsha Varwandkar ,Career Psychologist ,www.aglakadam.com .Raipur

Comments»

1. Verma Umesh - January 19, 2010

Good Blog

2. Bharti Ojha - January 19, 2010

Varsha ji Bhaut Shundar..
Aapke Blog ke maadhyam se Vasantik Saprya ki Pawan bela me Maa Pramba Saraswati ke Dwadash naam sabhi Mitron ke liye..

Prathamam Bharti Naam, Dwitiyam cha Saraswati,
Tritiyam sharadaa devi, Chartham hansvahini,
Panchamam Jagatikhyata, Shashtham Vagiishwari tatha,
Saptamam Kumudi Prokta, Ashtmam Brahmcharinim,
Navamam Budh mata cha, Dasham Vardayini,
Dwadaishetani Namani trisandhyam yah pathhennar,
Jivyhyagre Vaste nityam Bramhroopa saraswati..
Saraswati Mahabhage Vidya kamal lochne,
Vishvroope vishalakshi Vidyam dehi namostute..

Maa ki kripa bani rahe har pal..
Saadar.
Bharti Ojha

3. aglakadam - January 21, 2010

भारती जी ,
धन्यवाद

.माँ सरस्वती हम सब पर कृपा बनाये रखे
वर्षा

4. dk - February 8, 2011

it s very good
but their are no explane all things


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