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क्‍यों डरें जिन्‍देगी में क्‍या होगा ,कुछ ना होगा तो तजरूबा होगा December 7, 2009

Posted by aglakadam in Jara hut ke.
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“क्‍यों डरें जिन्‍देगी में क्‍या होगा

कुछ ना होगा तो तजरूबा होगा ”

जावेद अख्तर जी की इन दो लाइनों ने तो जैसे जिन्दगी को अपने में समां लिया है |हम

और आप तो सारी जिन्दगी बस इसी कसमकश में रहते है की ये निर्णय लू या वो ?सही गलत के फेर में हम तो हमेशा ही पसोपेश में ही रहते है |कई बार जिन्दगी हमे सिर्फ एक ही मौका देती है ,अगर उस अवसर को समझ कर हम सही निर्णय ले पाए ,तो ठीक नहीं तो बाद मैं अवसर दरवाजा नहीं खटखटाता |कोई भी काम की शुरुआत के पहले ही हम इतना विचार करते है परिणामो की,कई बार सिर्फ नकारात्मक सोच कर आगे ही नहीं बढ पाते| |अरे सीखना हो तो उस नन्हे से बच्चे से सीखो जिसने अभी सिर्फ अपने बड़ो की अंगुली पकड़ कर चलना सीखा है |जंहा उसे मौका मिला बच्चा बस चलना शुरु कर देता है ,वो गिरता है पड़ता है ,लडखडाता है ,लेकिन वो एक बार की चोट से घबरा कर वो चलना बंद नहीं करता है .बस ऐसे ही अनुभवो से वो सीखते जाता है और छोटे छोटे कदम बड़ा कर लम्बा रास्ता कट जाता है –

वर्षा वरवँड़कर,कैरियर मनोवैज्ञानिक ,अगलाकदम.कॉम ,रायपुर 07-12-2009

Comments»

1. Verma Umesh - December 7, 2009

बेहतरीन ब्लॉग .. बहुत अच्छी बात कही आपने

Varsha Varwandkar - December 7, 2009

धन्यवाद ,उमेश जी प्रोत्साहन के लिये —Varsha Varwandkar

2. Krishna Kumar Mishra - December 7, 2009

उम्दा लेख

3. Verma Umesh - December 10, 2009

आपके अगले ब्लॉग पोस्ट का इन्तेजार है… कृपया नियमित लिखें तो अच्छी बात होगी

4. SHRINIDHI DHARMADHIKARY - December 11, 2009

Agla kadam mujhe aakarshit karta ja raha hai.
Pl. keep posting encouraging ideas.


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