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महाराष्ट्र में यह कैसा “राज” November 10, 2009

Posted by aglakadam in Jara hut ke.
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१०-११-२००९,रायपुर
कितना अच्छा होता की महाराष्ट्र की युवा शक्ति भाषा विवाद में न पड़कर ,अपनी उर्जा कितने ही सकारत्मक कार्यो में लगाती ?फिर चाहे बात बिजली की कटौती की हो या किसान आत्महत्या की हो या बेरोजगारी की हो या विकास से जुडी गंम्भीर चुनौतियो की हो ,इन मुदधो पर शायद बहस की जाये तो इन सब का कोई न कोई हल तो निकलेगा न ?कितने बार हमने पाया है कि युवा वर्ग अपने अन्दर की आग को पहचान ही नहीं पाता और दिग्भ्रमित हो कर ऐसे रस्ते अख्तियार कर लेता है ,जिसकी कोई मंजिल ही नहीं होती .आज से ठीक बीस साल पहले बर्लिन की दीवार को तोड़कर राष्ट्र को नया रूप दिया गया ,और वो वंहा मिल कर प्रगति का जश्न मना रहे है और हम भाषा के नाम पर देश को तोड़ कर “राज ” करने का सपना देख रहे है ——-वर्षा अजित वरवँड़कर,अगला कदम . कॉम,रायपुर

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